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Tuesday, March 29, 2011

Tantra-Shastra

Tantra-Shastra - तंत्र-शास्त्र 

तंत्र शास्त्र भारत की एक प्राचीन विद्या है। यह शास्त्र वेदों के समय से हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग रहा है। विश्वास है कि तंत्र ग्रंथ भगवान शिव के मुख से आविर्भूत हुए हैं। उनको पवित्र और प्रामाणिक माना गया है। भारतीय साहित्य में 'तंत्र' की एक विशिष्ट स्थिति है। जनसाधारण में इसके व्यापक प्रचार के न होने का एक कारण यह भी था कि तंत्रों के कुछ अंश समझने में इतने कठिन थे कि गुरु के बिना समझे नहीं जा सकते थे। अतः जनता का उनके प्रति अन्धकार में रहना स्वाभाविक ही था। ज्ञान का अभाव ही शंकाओं का कारण बना।
 
तंत्र शास्त्र वेदों के समय से हमारे धर्म का अभिन्न अंग रहा है। वैसे तो सभी साधनाओं में मंत्र, तंत्र एक-दूसरे से इतने मिले हुए हैं कि उनको अलग-अलग नहीं किया जा सकता, पर जिन साधनों में तंत्र की प्रधानता होती है, उन्हें हम 'तंत्र साधना' मान लेते हैं। 'यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे' की उक्ति के अनुसार हमारे शरीर की रचना भी उसी आधार पर हुई है जिस पर कि पूर्ण ब्रह्माण्ड की।
 
तांत्रिक साधना का मूल उद्देश्य सिद्धि से साक्षात्कार करना है। इसके लिए अन्तर्मुखी होकर साधनाएं की जाती हैं। तांत्रिक साधना को साधारणतया वाम मार्ग कहा जाता है। कुछ साधकों का लक्ष्य केवल प्रेत सिद्धि होता है, श्मशान में जाकर मांस-मदिरा आदि पदार्थों के द्वारा प्रेतात्माओं को सिद्ध कर लेते हैं। ऐसे साधकों की अंतिम गति खराब होती है। वे प्रेतात्माएं उन साधकों को अपनी योनि में ले जाती हैं। श्मशान में साधना करने वाले का निडर होना आवश्यक है। जो निडर नहीं है वे दुस्साहस न करें। तांत्रिकों का यह अटूट विश्वास है, जब रात के समय सारा संसार सोता है तब केवल योगी जागते हैं।
 
'या निशा सर्वभूतानां, तस्यां जागर्ति संयमी।' 


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Friday, March 25, 2011

Do The Puja Anyway You Can

Do The Puja Anyway You Can With Devotion And Love For Lord In Your Heart

God out of His mercy will overlook all the shortcomings of men if they pursue the path of devotion with fervor. At the end of worship, daily or occasional, a prayer is offered to God not to mind the defects while chanting the mantras or adopting the procedures or for forgetting to do some duties out of ignorance. The Almighty is compassionate enough to ignore such errors. Thus, mercy being His chief trait, a devotee need not be concerned with minor defects if his endeavor is absolutely sincere but the enjoined duties should not be abandoned.  


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Thursday, March 17, 2011

Source Of Energy-Surya Stotra

Source Of Energy-Surya Stotra

ऊर्जा स्रोत - सूर्य स्तोत्र

 

प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं

रूपं हि मंडलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि।

सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं

ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम्‌॥

प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङ्मनोभि-

र्ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैर्नुतमर्चितं च।

वृष्टिप्रमोचनविनिग्रहहेतुभूतं

त्रैलोक्यपालनपरं त्रिगुणात्मकं च॥

प्रातर्भजामि सवितारमन्तशक्तिं

 

मैं सूर्य भगवान के उस श्रेष्ठ रूप का प्रातः समय स्मरण करता हूँ, जिसका मंडल ऋग्वेद है, तनु यजुर्वेद है और किरणें सामवेद हैं तथा जो ब्रह्मा का दिन है, जगत की उत्पत्ति, रक्षा और नाश का कारण है तथा अलक्ष्य और अचिंत्यस्वरूप है।      

 

पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च।

तं सर्वलोककलनात्मककालमूर्तिं

गोकण्ठबंधनविमचोनमादिदेवम्‌॥

श्लोकत्रयमिदं भानोः प्रातः प्रातः पठेत्‌ तु यः।

स सर्वव्याधिनिर्मुक्तः परं सुखमवाप्नुयात्‌॥

 

'मैं सूर्य भगवान के उस श्रेष्ठ रूप का प्रातः समय स्मरण करता हूँ, जिसका मंडल ऋग्वेद है, तनु यजुर्वेद है और किरणें सामवेद हैं तथा जो ब्रह्मा का दिन है, जगत की उत्पत्ति, रक्षा और नाश का कारण है तथा अलक्ष्य और अचिंत्यस्वरूप है।

मैं प्रातः समय शरीर, वाणी और मन के द्वारा ब्रह्मा, इन्द्र आदि देवताओं से स्तुत और पूजित, वृष्टि के कारण एवं अवृष्टि के हेतु, तीनों लोकों के पालन में तत्पर और सत्व आदि त्रिगुण रूप धारण करने वाले तरणि (सूर्य भगवान) को नमस्कार करता हूँ।

जो पापों के समूह तथा शत्रुजनित भय एवं रोगों का नाश करनेवाले हैं, सबसे उत्कृष्ट हैं, संपूर्ण लोकों के समय की गणना के निमित्त भूतकाल स्वरूप हैं और गौओं के कण्ठबंधन छुड़ाने वाले हैं, उन अनंत शक्ति आदिदेव सविता (सूर्य भगवान) का मैं प्रातःकाल भजन-कीतर्न करता हूँ।' जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य के स्मरणरूप इन श्लोकों का पाठ करता है, वह सब रोगों से मुक्त होकर परम सुख प्राप्त कर सकता है।


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Friday, March 11, 2011

Educational Remedies

 Educational Remedies - ज्ञान-विद्या की प्राप्ति के लिए आसान विधि

 

विद्यार्थियों हेतु एक आसान विधि का वर्णन किया जा रहा है, जिससे साधक को निश्चित लाभ होगा।  गणेश भगवान एवं विद्या दात्री माँ सरस्वती का एक चित्र लें। पूजन सामग्री सम्मुख रखें (गाय के घी का दीपक, धूप, कपूर, पीले चावल, सफेद या पीला मिष्ठान्न, गंगा जल, भोज पत्र, गोरोचन, कुंकुम, केसर, लाल चंदन, अनार या तुलसी की कलम इत्यादि)। सर्वप्रथम गुरु का ध्यान करें।

मंत्र- गुरु सठ गुरु हठ गुरु हैं वीर, गुरु साहब सुमिरों बड़ी भांत सिंगी ढोरों बन कहो, मन नाउं करतार। सकल गुरु की हर भजे, छटटा पकर उठ जाग चैत संभार श्री परमहंस।

गणेश ध्यान : ॐ वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।

गणेश मंत्र : ॐ वक्रतुंडाय हूं॥

दिशाबंध : ॐ वज्रक्रोधाय महादंताय। दशा दिशों बंध बंध हूं फट् स्वाहा।

तत्पश्चात गोरोचन, केसर, कुंकुम और लाल चंदन को गंगा जल में घिसकर स्याही बना लें और भोज पत्र पर निम्न मंत्र लिखकर, माँ सरस्वती के चित्र के साथ रखकर एक माला रोज मंत्र का जाप करें।

सरस्वती गायत्री मंत्र : ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।

 

प्रथम दिन 5 माला का जाप करने से साक्षात माँ सरस्वती प्रसन्न हो जाती हैं तथा साधक को ज्ञान-विद्या का लाभ प्राप्त होना शुरू हो जाता है। नित्य कर्म करने पर साधक ज्ञान-विद्या प्राप्त करने के क्षेत्र में निरंतर बढ़ता जाता है। इसके अलावा विद्यार्थियों को ध्यान करने के लिए त्राटक अवश्य करना चाहिए। 10 मिनट रोज त्राटक करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा साधक को एक बार पढ़ने पर कंठस्थ हो जाता है। विद्यार्थियों को त्राटक अभ्यास करना चाहिए। लाभ स्वयं साधक देखेगा। पाठक त्राटक वृत्त को सफेद कागज पर अथवा सफेद दीवार पर अपनी दृष्टि के समांतर चिपकाएँ तथा पद्मासन में बैठकर समस्त ध्यान केंद्रित करते हुए 'ॐ' पर दृष्टि को स्थिर कर नित्य अधिकतम 10 मिनट अभ्यास करें।

 

विद्या प्राप्ति का मंत्र

घंटाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनुः सायकं हस्ताब्जैर्दघतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्‌।

गौरीदेहसमुद्भवा त्रिनयनामांधारभूतां महापूर्वामत्र सरस्वती मनुमजे शुम्भादि दैत्यार्दिनीम्‌॥

स्वहस्त कमल में घंटा, त्रिशूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण को धारण करने वाली, गोरी देह से उत्पन्ना, त्रिनेत्रा, मेघास्थित चंद्रमा के समान कांति वाली, संसार की आधारभूता, शुंभादि दैत्यमर्दिनी महासरस्वती को हम नमस्कार करते हैं। माँ सरस्वती प्रधानतः जगत की उत्पत्ति और ज्ञान का संचार करती है।

 

विद्या प्राप्ति का यंत्र :

विधि : इस यंत्र को शुभ मुहूर्त में, चाँदी या कांस्य की थाली में, केसर की स्याही से, अनार की कलम से लिखकर, सविधि पूजन करके माता सरस्वतीजी की आरती करें। यात्रांकित कांस्य थाली में भोजन परोसकर श्री सरस्वत्यै स्वाहा, भूपतये स्वाहा, भुवनपतये स्वाहा, भूतात्मपतये स्वाहा चार ग्रास अर्पण करके स्वयं भोजन करें। याद रहे, यंत्र भोजन परोसने से पहले धोना नहीं चाहिए। इसी प्रकार 14 दिनों तक नित्य करने से यंत्र प्रयोग मस्तिष्क में स्नायु तंत्र को सक्रिय (चैतन्य) करता है और मनन करने की शक्ति बढ़ जाती है। धैर्य, मनोबल, आस्थाकी वृद्धि होती है और मस्तिष्क काम करने के लिए सक्षम हो जाता है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। विद्या वृद्धि में प्रगति स्वयं होने लगती है।

एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र : ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।


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Wednesday, March 2, 2011

Aroma & Herbs

Aroma & Herbs
 
Vedic Astrological Remedies also involve use of aromas & herbs, which ensures the positive influence of a particular planet. We are giving below a brief description of such practice for each planet.
 
Sun
Solar energy is increased by taking spicy and fiery herbs, like cayenne, black pepper, dry ginger, long pepper, cardamom, saffron, bayberry and cinnamon (specially the Ayurvedic formula Trikatu). Aromatic oils and fragrances for the Sun are camphor, cinnamon, eucalyptus, saffron - most warm and stimulating oils.
 
Moon
Good herbs for the Moon are demulcent and tonic herbs like marshmallow, slippery elm, comfrey root, Solomon's seal, Shatavari, white musali, bala and rehmannia particularly taken in milk decoctions. Fragrance of white flowers like jasmine, gardenia, lotus and lily are good as is sandalwood oil. These can be applied to the heart or to the third eye.
 
Mars
Most of the spices that are good for the Sun work well for Mars (like cinnamon, saffron, cayenne or black pepper) but combined with tonics like ginseng, astragalus, ashwagandha, guggul or myrrh. Turmeric, garlic, onions and asafetida can be very good (particularly the Ayurvedic formula Hingashatak). When Mars is strong, however, we need bitter herbs like aloe, gentian, golden seal and Echinacea.
 
Mercury
Good herbs for Mercury are nerviness like gotu kola, bhringaraj (eclipta), skullcap, passionflower, betony, jatamansi, zizyphus, camomile, mint and sage. Basil, particularly holy basil (tulsi) is specific for Mercury (Vishnu). Good oils and aromas are mint, wintergreen, eucalyptus, cedar, thyme and sage, which clear and open the mind. Yet they should be balanced with mind-calming oils like sandalwood, plumeria (frangipani) and lotus.
 
Jupiter
Jupiter energy is increased by tonic herbs like ashwagandha, bala, licorice, ginseng and astragalus particularly as taken in milk decoctions, with ghee (clarifies butter) or a herb jellies. Good foods for increasing Jupiter energy are nuts like almonds, walnuts, cashews and sesame seeds and oils like ghee, sesame and almond.
 
Venus
Venus likes all flowers and sweet fragrances: rose, saffron, jasmine, lotus, lily and iris. Others good herbs are tonics like shatavari, white musali, amalaki, aloe gel, rehmannia dang gui and red raspberry.
 
Saturn
Good herbs for a weak Saturn are myrrh, frankincense, guggul, ashwagandha, shilajit, haritaki and comfrey root - herbs to strengthen the bones and promote healing. The Ayurvedic formula Triphala is specific for Saturn, as it cleanses all waste materials and also tonifies the deeper tissues.
 
Good aromas for Saturn are sandalwood, frankincense, cedar and juniper, much like the herbs.
 
Rahu
Rahu is very subtle force and cannot be dealt with on a simple outer level. Aromas for clearing the psychic air can be helpful like camphor, bayberry, sage, eucalyptus or wintergreen as can calming fragrances like sandalwood, lotus and frankincense. Calamus is the best herb for Rahu.
 
Ketu
Ketu, like Rahu, is subtle. Herbs to increase perception like sage, calamus, bayberry, wild ginger and juniper may be useful. Penetrating aromatic oils like camphor, cedar, myrrh and frankincense can be good. Afflictions of a strong Ketu, however, required cooling nerviness like gotu kola, bhringaraj, skullcap and passionflower.

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Tuesday, March 1, 2011

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